जशपुर, 30 मई 2026। जशपुर पुलिस विभाग में अनुशासनहीनता और कर्तव्य के प्रति लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह ने बड़ी कार्रवाई की है। विभागीय जांच पूरी होने के बाद पांच आरक्षकों के विरुद्ध अंतिम आदेश जारी करते हुए तीन आरक्षकों को सेवा से पृथक (बर्खास्त) कर दिया गया है, जबकि दो अन्य को कठोर विभागीय दंड दिया गया है।
पुलिस रेगुलेशन के नियम 221(अ) के तहत की गई इस कार्रवाई में आरक्षक क्रमांक 737 संतोष कुमार राम, आरक्षक क्रमांक 525 नेल्सन तिग्गा तथा आरक्षक क्रमांक 394 अशोक कुमार एक्का को बार-बार लंबी अवधि तक बिना अनुमति गैरहाजिर रहने और सेवा अनुशासन का लगातार उल्लंघन करने के कारण सेवा से पृथक कर दिया गया। वहीं आरक्षक क्रमांक 47 इरीमियस कुजूर को एक वेतन वृद्धि के बराबर धनराशि की कमी संचयी प्रभाव से तथा आरक्षक क्रमांक 144 बिंदेश्वर राम को एक वर्ष के लिए आरक्षक के न्यूनतम वेतनमान पर लाने का दंड दिया गया है, जिसका प्रभाव भविष्य की वेतनवृद्धि और पेंशन पर भी पड़ेगा।
जांच में सामने आया कि इन सभी आरक्षकों के विरुद्ध लंबे समय से अनधिकृत अनुपस्थिति, स्वेच्छाचारिता, कर्तव्य के प्रति उदासीनता और अनुशासनहीनता की शिकायतें थीं। बार-बार अवसर दिए जाने और पूर्व में कई बार दंडित किए जाने के बावजूद उनके व्यवहार में सुधार नहीं हुआ।
विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार आरक्षक संतोष कुमार राम ने अपने 13 वर्ष के सेवाकाल में 33 बार कुल 469 दिनों तक गैरहाजिर रहकर अनुशासनहीनता प्रदर्शित की थी। उन्हें पहले भी 23 बार दंडित किया जा चुका था। वहीं नेल्सन तिग्गा 17 वर्ष की सेवा में 28 बार कुल 923 दिनों तक अनुपस्थित रहे तथा उन्हें 27 बार विभिन्न दंड मिल चुके थे। अशोक कुमार एक्का ने 20 वर्ष की सेवा में 30 बार कुल 1151 दिनों तक गैरहाजिर रहकर विभागीय नियमों का उल्लंघन किया था। उन्हें भी पूर्व में कई बार बड़ी और छोटी सजाएं दी जा चुकी थीं।
इसी प्रकार इरीमियस कुजूर 17 वर्ष की सेवा में 139 दिनों तक तथा बिंदेश्वर राम 18 वर्ष की सेवा में 216 दिनों तक अनधिकृत रूप से गैरहाजिर पाए गए। उनकी सेवा पुस्तिका और विभागीय जांच रिपोर्ट के आधार पर अलग-अलग कठोर दंड निर्धारित किए गए।
डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह ने कहा कि पुलिस विभाग में अनुशासन सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा कर्तव्य के प्रति लापरवाही, स्वेच्छाचारिता अथवा अनुशासनहीनता को किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में विभागीय कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।